क्या है परिवहन विभाग का नया अभियान
सीतापुर में एआरटीओ प्रशासन, सर्वेश चतुर्वेदी के नेतृत्व में परिवहन विभाग ने ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाली बाइकों के खिलाफ एक विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य सड़कों पर शांति बनाए रखना और पर्यावरण को सुरक्षित रखना है। अब तक विभाग द्वारा 11 ऐसी बाइकों का चालान किया जा चुका है जो मॉडिफाइड साइलेंसर के साथ पकड़ी गई थीं।
सिर्फ वाहन मालिक ही नहीं, मैकेनिक पर भी होगी कार्रवाई
अक्सर लोग सोचते हैं कि पकड़ा जाने पर सिर्फ जुर्माना भरना होगा, लेकिन इस बार कार्रवाई का दायरा बड़ा है। परिवहन विभाग ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है:
मॉडिफाइड साइलेंसर के साथ पकड़े जाने पर 10,000 रुपये का भारी चालान।यदि किसी मैकेनिक ने गैर-मानक साइलेंसर लगाया है या शोरूम से मिलीभगत पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी कठोर विधिक कार्रवाई की जाएगी।
क्या कहता है कानून?
केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के अनुसार, किसी भी मोटरसाइकिल का शोर 80 डेसिबल से अधिक नहीं होना चाहिए। कंपनी द्वारा फिट किया गया साइलेंसर ही एकमात्र वैध मानक है। साइलेंसर को छोटा करना, उसमें पाइप डालना या किसी भी प्रकार का छेड़छाड़ करना गैरकानूनी है।
कैसे करें जिम्मेदारी का निर्वहन?
एक जागरूक नागरिक के तौर पर यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम प्रदूषण मुक्त वातावरण को बढ़ावा दें। यदि आपके क्षेत्र में कोई अवैध रूप से मॉडिफाइड बाइक चलाकर शोर मचा रहा है, तो आप इसकी सूचना सीधे परिवहन विभाग को ईमेल के माध्यम से दे सकते हैं। विभाग आपकी शिकायत पर जांच करेगा और दोषी पाए जाने पर एम.वी. एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
बाइक का शौक अच्छी बात है, लेकिन वह दूसरों की शांति और कानून की कीमत पर नहीं होना चाहिए। अपनी बाइक को कंपनी के मानकों के अनुसार रखें और चालान के साथ-साथ कानूनी मुसीबत से भी बचें। सुरक्षित चलें और नियमों का पालन करें!
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