#सीतापुर: सीतापुर में 21 अप्रैल से 15 जून तक धारा 163 लागू, सार्वजनिक स्थलों पर पांच से अधिक लोगों के जुटने पर रोक

सीतापुर(उत्तर प्रदेश)।आगामी त्योहारों, प्रतियोगी परीक्षाओं और शांति-व्यवस्था के दृष्टिगत जिला प्रशासन ने जनपद में कड़े प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। अपर जिला मजिस्ट्रेट नीतीश कुमार सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा-163 के तहत यह आदेश पारित किए हैं, जो 21 अप्रैल 2026 से 15 जून 2026 तक पूरे जनपद में प्रभावी रहेंगे।
प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इस अवधि में पांच या उससे अधिक लोगों के सार्वजनिक स्थल पर एक साथ एकत्रित होने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। किसी भी प्रकार के जुलूस, सभा, रैली या सार्वजनिक कार्यक्रम के आयोजन के लिए सक्षम अधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि अनुमति मिलने पर भी आयोजकों को कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।
सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री डालने या फॉरवर्ड करने पर भी प्रशासन की पैनी नजर रहेगी। एडीएम ने निर्देश दिए हैं कि कोई भी व्यक्ति ऐसे हस्तलिखित या मुद्रित पर्चे वितरित नहीं करेगा और न ही उत्तेजनात्मक भाषण देगा, जिससे किसी वर्ग विशेष की भावनाओं को ठेस पहुंचे या शांति व्यवस्था प्रभावित हो। साथ ही, सार्वजनिक स्थलों पर शराब, पान, गुटखा और तंबाकू का सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। परीक्षा केंद्रों के 200 मीटर के दायरे में फोटोस्टेट की दुकानें, साइबर कैफे और पीसीओ बंद रहेंगे। परीक्षार्थियों को गुमराह करने वाली सामग्री का मुद्रण या वितरण करने वालों के खिलाफ प्रशासन सख्त रुख अपनाएगा। केंद्रों पर मोबाइल, कैलकुलेटर, ब्लूटूथ या अन्य आई.टी. गैजेट्स ले जाना वर्जित है।
आदेश के तहत किसी भी सार्वजनिक स्थल पर आग्नेयास्त्र या धारदार हथियार लेकर चलने पर रोक लगाई गई है। हालांकि, ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों, लाठी-डंडे का सहारा लेकर चलने वाले बुजुर्गों और धार्मिक अनिवार्यता के कारण निर्धारित शस्त्र रखने वाले सिख समुदाय के व्यक्तियों को इससे छूट दी गई है। बिना अनुमति के डीजे या ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग भी नहीं किया जा सकेगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से एकपक्षीय रूप से लागू किया गया है। यदि कोई भी व्यक्ति इन निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो उसके विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा-223 एवं अन्य विधिक प्रावधानों के अंतर्गत कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।


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