लहरपुर सीतापुर(उत्तर प्रदेश): एक तरफ सरकार किसानों की आय दोगुनी करने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर सीतापुर के लहरपुर में अधिकारियों की उदासीनता और भ्रष्टाचार ने एक किसान परिवार को दाने-दाने के लिए मोहताज कर दिया है। नगर पालिका की लापरवाही के कारण बीते एक दशक से किसान के खेतों में नाले का गंदा पानी भरा हुआ है, जिससे उपजाऊ जमीन अब दलदल में तब्दील हो चुकी है।
मजदूरी करने को विवश हुआ 13 सदस्यों का परिवारजोशी टोला निवासी काशीराम और उनके भाई प्यारेलाल ने उप जिलाधिकारी लहरपुर को प्रार्थना पत्र सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। काशीराम का कहना है कि उनकी गाटा संख्या 30 ग्राम बेहड़ माधव की भूमि से सटा हुआ सरकारी नाला नगर के दूषित जल को ढोता है। नाले की साफ-सफाई न होने और जल वहन क्षमता कम होने के कारण पानी खेतों में भर जाता है। हालत यह है कि पिछले 10 वर्षों से खेत में अनाज का एक दाना तक पैदा नहीं हुआ है। 13 सदस्यों वाला यह बड़ा परिवार आज दूसरों के यहां मजदूरी कर पेट पालने को विवश है।
नवनिर्माण पर उठे सवाल: पुराने मानकों पर ही खानापूर्तिवर्तमान में नाले का पुनर्निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन पीड़ितों का आरोप है कि इसमें भी भारी अनियमितता बरती जा रही है। काशीराम ने बताया "जब नाले की चौड़ाई और गहराई पुराने मानकों पर ही रखनी थी, तो करोड़ों खर्च कर पुराने नाले को तोड़ने का क्या औचित्य था? नए निर्माण में भी क्षमता नहीं बढ़ाई जा रही है, जिससे भविष्य में भी जलभराव की समस्या जस की तस बनी रहेगी।"
अधिकारियों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया
मामले की गंभीरता को लेकर जब अधिशासी अधिकारी अनूप राय से बात की गई, तो उनका जवाब बेहद चौंकाने वाला था। उन्होंने नाले की लंबाई और चौड़ाई की जानकारी होने से साफ इनकार कर दिया और पल्ला झाड़ते हुए कहा कि इस संबंध में जे.ई. से ही बात की जाए। अधिकारियों के इस टालमटोल वाले रवैये से साफ है कि धरातल पर समस्याओं के समाधान के प्रति विभाग कितना गंभीर है।
पीड़ितों मांग
नाले की गहराई-चौड़ाई बढ़ाई जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो।अब देखना यह है कि एसडीएम को दिए गए इस प्रार्थना पत्र के बाद क्या इस पीड़ित किसान परिवार को अपनी जमीन वापस खेती योग्य मिल पाएगी या भ्रष्ट तंत्र की भेंट चढ़ी यह व्यवस्था यूं ही चलती रहेगी।
संवाददाता,अनिल मिश्रा (लहरपुर, सीतापुर)
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