सीतापुर(उत्तर प्रदेश): जनपद में दुधारू पशुओं के लिए पौष्टिक और हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पशुपालन विभाग ने कमर कस ली है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एम.पी. सिंह चन्देल ने बताया कि जिले में नैपियर घास की जड़ें उपलब्ध कराने की योजना का संचालन किया जा रहा है। इसके तहत इच्छुक लाभार्थियों का चयन कर उन्हें न केवल निःशुल्क बीज उपलब्ध कराया जाएगा, बल्कि खेती के लिए आर्थिक सहायता भी दी जाएगी।
(काल्पनिक चित्र)
इन लाभार्थियों को मिलेगी प्राथमिकता
योजना के अंतर्गत पंजीकृत गौशालाओं, गौ आश्रय स्थलों, प्रगतिशील किसानों, स्वयं सहायता समूहों एफपीओ और गैर सरकारी संस्थाओं का चयन किया जाएगा। डॉ. चन्देल ने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला मुखिया वाले परिवारों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा, उन ग्राम पंचायतों को वरीयता मिलेगी जिनके पास चारागाह की सिंचित भूमि उपलब्ध है और जो गौ-आश्रय स्थलों से संबद्ध हैं।
0.2 हेक्टेयर भूमि अनिवार्य, मिलेगा नकद अनुदान
पात्रता की शर्तों के अनुसार, लाभार्थी के पास कम से कम 0.2 हेक्टेयर सिंचित भूमि होना आवश्यक है। योजना की खास बात यह है कि चयनित लाभार्थियों को प्रथम वर्ष में नैपियर की जड़ें पशुधन प्रक्षेत्रों से निःशुल्क प्रदान की जाएंगी। इसके साथ ही, खेत की तैयारी, खाद, उर्वरक और सिंचाई जैसे कार्यों के लिए 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से अनुदान सहायता दो किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजी जाएगी।लाभार्थी को एक शपथ पत्र देना होगा कि अगले वर्ष वह विभाग को प्राप्त जड़ों के सापेक्ष दोगुनी संख्या में जड़ें निःशुल्क वापस करेगा, ताकि अन्य किसानों को लाभ मिल सके।
आवेदन के लिए 'पहले आओ-पहले पाओ' की नीति
इच्छुक आवेदक अपने नजदीकी विकास खंड के पशु चिकित्सालय में आवेदन जमा कर सकते हैं। आवेदन के साथ आधार कार्ड, भूमि के दस्तावेज और बैंक पासबुक की स्व-प्रमाणित छायाप्रति संलग्न करना अनिवार्य है। पशु चिकित्सा अधिकारियों द्वारा तैयार की गई सूची को जिला स्तरीय चयन समिति के पास भेजा जाएगा। यदि आवेदकों की संख्या अधिक होती है, तो 'पहले आओ-पहले पाओ'के सिद्धांत पर लाभार्थियों का अंतिम चयन किया जाएगा।
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