# सीतापुर:68 साल पुराने रिकॉर्ड खंगालने के बाद डीएम का चला हंटर, अरबों की जमीन राज्य सरकार में निहित

फर्जीवाड़े का अंत: ‘बोना वेकेंटिया’ के तहत प्रशासन ने लिया 5.7 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा, विदेशी मुद्रा कानून का उल्लंघन पड़ा भारी
सीतापुर (उत्तर प्रदेश):हुसैनगंज स्थित ऐतिहासिक मेसर्स प्लाईवुड प्रोडक्ट्स फैक्ट्री की बेशकीमती जमीन को लेकर चल रहा दशकों पुराना कानूनी मायाजाल सोमवार को जिलाधिकारी के एक फैसले से छिन्न-भिन्न हो गया। जिलाधिकारी राजागणपति आर. के न्यायालय ने ऐतिहासिक आदेश में फैक्ट्री की कुल 5.697 हेक्टेयर भूमि को उत्तर प्रदेश सरकार की संपत्ति घोषित कर दिया है।
प्रशासन की इस कार्रवाई से भू-माफियाओं और फर्जी कागजों के सहारे अरबों की संपत्ति हथियाने की फिराक में बैठे सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि विदेशी भागीदारों के भारत छोड़ने के बाद यह संपत्ति ‘बोना वेकेंटिया’ (स्वामीविहीन) की श्रेणी में आ गई थी।
फेरा (FERA) के उल्लंघन ने बिगाड़ा खेल
जिलाधिकारी न्यायालय ने जांच में पाया कि वर्ष 1983 से 1985 के बीच विदेशी भागीदारों के अंशों को जाफरुल्ला समूह को हस्तांतरित करने का प्रयास किया गया था। यह पूरा खेल विदेशी मुद्रा विनियमन अधिनियम , 1973 की धारा 31 को ताक पर रखकर खेला गया। भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति के बिना किए गए इन हस्तांतरणों को सुप्रीम कोर्ट की नजीरों के आधार पर शून्य घोषित कर दिया गया, जिससे स्वामित्व के तमाम दावों की नींव ढह गई।
68 साल से रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हुए नए नाम
जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि वर्ष 1958 के बाद से फर्म की संरचना में हुए किसी भी बदलाव की जानकारी रजिस्ट्रार ऑफ फर्म्स को नहीं दी गई। सरकारी दस्तावेजों में आज भी हेनरी थॉम्पसन और उनके पुराने साथी ही फर्म के पंजीकृत भागीदार हैं, जो दशकों पहले देश छोड़ चुके हैं। वर्ष 2004 में इसी नाम से बनाई गई नई फर्म के दावों को भी कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह मूल फर्म से पूरी तरह अलग विधिक इकाई है।
बैंक और श्रमिक संगठन को भी झटका
सुनवाई के दौरान सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने संपत्ति के बंधक होने और श्रमिक संगठन ने 10 करोड़ रुपये के बकाए का दावा पेश किया था। डीएम कोर्ट ने इन सभी आपत्तियों को दरकिनार करते हुए कहा:
 "जब संपत्ति का मूल स्वामित्व ही फर्जी दावों पर आधारित था, तो उस पर किया गया कोई भी बंधक या कानूनी भार राज्य सरकार की संप्रभु शक्ति  के आगे प्रभावी नहीं होगा।"
मुआवजे की होगी वसूली
जिलाधिकारी ने एनएचएआई द्वारा पूर्व में दिए गए मुआवजे की राशि को गलत हाथों में जाना माना है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि गलत तरीके से लिए गए मुआवजे की वसूली के लिए तत्काल प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। सोमवार को इस आदेश के बाद तहसील प्रशासन ने जमीन को सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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