सीतापुर(उत्तर प्रदेश): शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल जन शिकायतों के निस्तारण को लेकर जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर. बेहद सख्त नजर आए। कलेक्ट्रेट सभागार में आईजीआरएस पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों की समीक्षा करते हुए उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि शिकायतों का निस्तारण महज औपचारिकता न हो, बल्कि शिकायतकर्ता को वास्तविक राहत और संतुष्टि मिलनी चाहिए।
औपचारिकता नहीं, स्थलीय जांच से हो समाधान
जिलाधिकारी ने बैठक में कहा कि शिकायतों का निस्तारण केवल कागजों पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक प्रकरण का स्थलीय निरीक्षण और तथ्यात्मक जांच अनिवार्य है। यदि कोई अधिकारी भ्रामक, अपूर्ण या तथ्यहीन आख्या प्रस्तुत करता है, तो उसके विरुद्ध जवाबदेही तय करते हुए कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
 गुणवत्तापूर्ण निस्तारण पर विशेष जोर
जिलाधिकारी ने विभागवार लंबित और डिफॉल्टर शिकायतों की समीक्षा करते हुए असंतोष जताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिकायतों की संख्या कम करना ही काफी नहीं है, बल्कि निस्तारण की गुणवत्ता शासन की पहली शर्त है। अधिकारियों को प्रतिदिन पोर्टल का अवलोकन करने और लंबित प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर निस्तारित करने का निर्देश दिया गया।
शिकायतकर्ता से फीडबैक लेना अनिवार्य
जिलाधिकारी ने कहा कि निस्तारण के बाद शिकायतकर्ता से दूरभाष या अन्य माध्यमों से संपर्क कर उनकी संतुष्टि सुनिश्चित की जाए। निस्तारण आख्या में की गई कार्रवाई, स्थलीय जांच और समाधान का स्पष्ट विवरण होना चाहिए। बैठक में अपर जिलाधिकारी आयुष चौधरी, एडीएम (न्यायिक) खालिद अंजुम सहित सभी उपजिलाधिकारी और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।