डॉ उदयशंकर भगत
वाराणसी (उत्तर प्रदेश): श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर धर्मनगरी काशी में 'हर और हरि' की एकात्मता का दिव्य स्वरूप साकार हो उठा। टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर काशीपुराधीश्वर बाबा विश्वनाथ की चल प्रतिमा का कन्हैया स्वरूप में अलौकिक श्रृंगार किया गया।
मोरपंख, मुकुट, बांसुरी और मनोहारी वस्त्रों से सुसज्जित देवाधिदेव जब झूले पर विराजे, तो श्रद्धालुओं को एक साथ कैलाश और वृंदावन का साक्षात्कार हुआ।
इस अवसर पर बाबा को बाल-गोपाल के प्रिय माखन-मिश्री का भोग अर्पित किया गया। महंत वाचस्पति तिवारी ने बताया कि ब्रह्ममुहूर्त में पं. सुशील त्रिपाठी के आचार्यत्व में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विशेष अनुष्ठान संपन्न हुआ। सायंकाल संजीव रत्न मिश्र द्वारा बाबा का भव्य श्रृंगार किया गया।
इसके बाद पागल बाबा और जयपुर के मोहन स्वामी के भजनों की स्वर-लहरियों के बीच पूरा परिसर 'हर-हर महादेव' और 'हरे कृष्णा' के जयकारों से देर रात तक गूंजता रहा।



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