#सीतापुर: योग दिवस विशेष:अपनों की सेहत, बुजुर्गों का आशीर्वाद और ठहर कर खुद से मिलने की एक खूबसूरत सुबह.

सीतापुर(उत्तर प्रदेश):कभी आंगन में नीम के पेड़ के नीचे दादा-दादी को सुबह-सुबह गहरी सांसें खींचते देखा है? या चूल्हे और रसोई की व्यस्तता के बीच मां को दो मिनट आंखें बंद कर शांत बैठे देखा है? आज जब पूरी दुनिया 'अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस' के बड़े-बड़े विज्ञापनों और मंचों से सजी है, तब हमें योग के उस रूप को याद करने की जरूरत है जो हमारे अपने घरों से शुरू होता है।

व्यस्तता की दौड़भाग और बिखरता सुकून

सच तो यह है कि आज की इस आपाधापी भरी जिंदगी में हमारे पास सबके लिए वक्त है कचहरी की तारीखों के लिए, दफ्तर की फाइलों के लिए, दुकान की गद्दी के लिए और सोशल मीडिया की दुनिया के लिए। लेकिन अगर वक्त नहीं है, तो सिर्फ खुद के लिए और उन अपनों के लिए जो हर वक्त हमारे अच्छे स्वास्थ्य की दुआ मांगते हैं। थका देने वाली इस दौड़भाग में जब हम तनाव लेकर घर लौटते हैं, तो उसका असर सिर्फ हम पर नहीं, हमारे पूरे परिवार पर पड़ता है। ऐसे में योग सिर्फ शरीर को मोड़ने की कोई कसरत नहीं है, बल्कि अपनी उस बिखरी हुई जिंदगी को वापस समेटने का नाम है मां पिताजी के घुटनों का दर्द कम हो, बच्चों के चेहरों पर मोबाइल की थकान की जगह कुदरती चमक हो, और आपके भीतर हर मुश्किल परिस्थिति से लड़ने का 'साहस' और मानसिक सुकून हो यही तो इस योग दिवस की असली कामयाबी है।

रिश्तों की डोर और आंगन की अनमोल मुस्कान

सोचिए, कितने दिन हो गए जब आपने अपने माता-पिता या बच्चों के साथ बैठकर सुबह की ताजी हवा का आनंद लिया हो? इस योग दिवस का सबसे खूबसूरत और भावुक पक्ष यही है कि यह हमें अपनों को समय देने का बहाना देता है। जब घर के बुजुर्ग, हम और हमारी अगली पीढ़ी एक साथ चटाई पर बैठकर प्राणायाम करते हैं, तो वहां सिर्फ बीमारी दूर नहीं होती, बल्कि पीढ़ियों का फासला मिट जाता है। बच्चों को बड़ों के संस्कार मिलते हैं और बुजुर्गों को एकांत के सन्नाटे से मुक्ति।

 स्वस्थ घर से ही समृद्ध होगा पूरा जिला

आइए, आज इस विशेष सुबह पर हम और आप मिलकर एक संकल्प लें। अपनी व्यस्त दिनचर्या में से सिर्फ 15 मिनट अपनी और अपने परिवार की सेहत को देंगे। क्योंकि जब तक सीतापुर का हर घर मुस्कुराएगा नहीं, तब तक हमारा समाज और हमारा जिला पूरी तरह समृद्ध नहीं हो सकता। आज ही एक गहरी सांस लीजिए, अपने भीतर की कड़वाहट को बाहर छोड़िए, मुस्कुराइए और अपनों का हाथ थामकर योग को जीवन का हिस्सा बनाइए।

 विशेष रिपोर्ट, वॉइस ऑफ सीतापुर

(सत्य, साहस और सटीक पत्रकारिता)  www.voiceofsitapur.in

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