09 मई को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर ज़ोर
सीतापुर (उत्तर प्रदेश): जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने न्याय की पहुँच को आसान बनाने के लिए पराविधिक स्वयंसेवकों के साथ एक अहम बैठक की है। जनपद न्यायाधीश श्री आशीष जैन के निर्देशन में हुई इस बैठक में स्वयंसेवकों को उनकी भूमिका और ज़िम्मेदारियों को लेकर निर्देश दिए गए।
ईमानदारी और निष्ठा ज़रूरी
प्राधिकरण के सचिव आलोक यादव ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि स्वयंसेवकों को अपने क्षेत्र में "पूर्ण ईमानदारी और निष्ठा" के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि पीएलवी का मुख्य काम ज़मीनी स्तर पर लोगों की समस्याओं को समझना और उन्हें कानूनी मदद दिलाना है।
लोक अदालत: एक मौका
आगामी 09 मई को होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर सचिव ने विशेष कार्ययोजना पेश की। उन्होंने कहा, "लोक अदालत केवल मुकदमों के निस्तारण का ज़रिया नहीं है, बल्कि यह आम जनता को कानूनी पेचीदगियों से बचाने का एक प्रभावी माध्यम है।" स्वयंसेवकों को निर्देशित किया गया है कि वे गाँवों में जाकर लोगों को इसके फायदों के बारे में बताएं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
कानूनी साक्षरता का अभाव न्याय की राह में सबसे बड़ी बाधा है, जिससे गरीब और ग्रामीण आबादी अक्सर वंचित रह जाती है। ऐसे में पराविधिक स्वयंसेवक न्यायपालिका और जनता के बीच एक सेतु का कार्य करते हैं, जो निःशुल्क विधिक सहायता की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाते हैं। लोक अदालतें न केवल अदालतों का बोझ कम करती हैं, बल्कि आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से विवादों का त्वरित और सस्ता समाधान भी प्रदान करती हैं। अतः जब तक नागरिक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक नहीं होंगे, तब तक 'समान न्याय' की संवैधानिक अवधारणा को पूर्णतः धरातल पर उतारना संभव नहीं है।
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