सीतापुर(उत्तर प्रदेश): सड़क सुरक्षा को ताक पर रखकर सड़कों पर यमदूत बनकर दौड़ रहे ओवरस्पीड वाहनों के खिलाफ परिवहन विभाग ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। विभाग द्वारा चलाए गए एक विशेष चेकिंग अभियान के तहत नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले 46 वाहनों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई से नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों में हड़कंप मच गया है।
इंटरसेप्टर के रडार में कैद हुई रफ्तार
एआरटीओ प्रशासन सर्वेश चतुर्वेदी ने बताया कि यह विशेष अभियान पूरी तरह से सड़क सुरक्षा को केंद्र में रखकर चलाया गया। अभियान के दौरान आधुनिक इंटरसेप्टर वाहन की मदद ली गई। इंटरसेप्टर के रडार सिस्टम के जरिए सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों की वास्तविक गति को मापा गया। जैसे ही कोई वाहन निर्धारित गति सीमा को पार करता पाया गया, उसे तुरंत चिह्नित कर मोटर वाहन अधिनियम की धारा 183 के तहत चालान और दंडात्मक कार्रवाई की जद में लाया गया।
हादसों की सबसे बड़ी वजह 'तेज रफ्तार'
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर यह साफ हुआ है कि अधिकांश गंभीर हादसों की मुख्य वजह तेज रफ्तार ही होती है। अक्सर वाहन चालक जल्दबाजी, रोमांच या घोर लापरवाही के कारण तय गति सीमा का उल्लंघन करते हैं। इसका नतीजा न केवल जानलेवा दुर्घटनाओं के रूप में सामने आता है, बल्कि बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ता है।
सुरक्षित सफर के लिए संयम जरूरी
परिवहन विभाग ने आम जनमानस और वाहन चालकों से पुरजोर अपील की है कि वे यातायात नियमों को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। नियंत्रित गति से वाहन चलाने पर न केवल चालक और सह-यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, बल्कि वाहन की लाइफ भी बेहतर रहती है। एआरटीओ ने स्पष्ट किया कि तेज रफ्तार पर अंकुश लगाने के लिए ऐसे औचक और विशेष चेकिंग अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेंगे। इस पूरे अभियान में प्रवर्तन दस्ते के आरक्षी भी मुस्तैद रहे।
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