#सीतापुर:कागजी फेर में थमीं सांसें: सड़क हादसे में दो युवकों ने तोड़ा दम; आईडी जनरेट होने के इंतजार में खड़ी रही एम्बुलेंस.

सीतापुर,(उत्तर प्रदेश)सीतापुर जिले में नैमिषारण्य के अटवा-बीबीपुर मार्ग पर शनिवार देर रात दर्दनाक सड़क हादसे में दो युवकों की जान चली गई। बाइकों पर सवार युवकों ने हेलमेट नहीं पहन रखा था, जो उनके लिए जानलेवा साबित हुआ,प्राप्त जानकारी के अनुसार, बकानिया गांव निवासी विशाल शनिवार देर रात अपनी बाइक से आटवां से घर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में सामने से आ रही एक अन्य बाइक से उनकी सीधी टक्कर हो गई। दूसरी बाइक पर औरंगाबाद नौसर निवासी गोविंद और उनके परिचित मिथुन सवार थे, जो अटवां से अपने गांव वापस जा रहे थे। टक्कर इतनी जोरदार थी कि तीनों सड़क पर गिरकर लहुलूहान हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नैमिषारण्य पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
अस्पताल में हंगामा, एम्बुलेंस मिलने में देरी
घायलों के परिजनों का आरोप है कि सीएचसी से रेफर किए जाने के बाद भी उन्हें समय पर एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। इस बदइंतजामी को लेकर आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा शुरू कर दिया। करीब आधे घंटे तक चले इस हंगामे के कारण स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। बाद में परिजनों ने मामले की जानकारी फोन पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी सुखरंजन को दी। सीएमओ के कड़े हस्तक्षेप और निर्देश के बाद ही घायलों को जिला अस्पताल के लिए रवाना किया जा सका।
                    (मृतक विशाल)
आईडी के चक्कर में फंसी रही जिंदगी
परिजनों ने एम्बुलेंस सेवा पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि डॉक्टरों द्वारा रेफर किए जाने के बाद जब विशाल को ले जाने के लिए कहा गया, तो एम्बुलेंस चालक ने 'आईडी जनरेट' न होने का बहाना बना दिया। चालक का कहना था कि बिना आईडी जनरेट हुए वह गाड़ी आगे नहीं बढ़ा सकता। इस तकनीकी कागजी कार्रवाई और सिस्टम की संवेदनहीनता के कारण एम्बुलेंस करीब आधे घंटे तक अस्पताल परिसर में ही खड़ी रही और कीमती समय बर्बाद होता रहा।
समय पर इलाज मिलता तो बच जाती जान
तमाम जद्दोजहद के बाद जब घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, तो वहां तैनात चिकित्सकों ने विशाल और गोविंद को मृत घोषित कर दिया। वहीं, तीसरे घायल मिथुन की हालत नाजुक बनी हुई है और उनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों का साफ कहना है कि अगर सिस्टम ने संवेदनशीलता दिखाई होती और एम्बुलेंस समय से रवाना हो जाती, तो शायद दोनों युवकों की जान बच सकती थी। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

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