#सीतापुर में प्रकृति का उत्सव: 'एक पेड़ माँ के नाम' थीम पर 22,500 पौधे रोपकर किया पर्यावरण का सृजन.

जनसहभागिता का बना उदाहरण, जनपद में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों व युवाओं की भागीदारी ने भरा उत्साह

सीतापुर(उत्तर प्रदेश): जनपद में आज 'वृक्षारोपण महाअभियान-2026' के तहत प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। “एक पेड़ माँ के नाम” थीम पर आयोजित इस वृहद महोत्सव में जन-जन की भागीदारी ने पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को एक जन आंदोलन में बदल दिया। मुख्य कार्यक्रम वैदेही वाटिका के निकट मिलेट्री फार्म में संपन्न हुआ, जहाँ 9 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 22,500 पौधे रोपकर हरियाली का संदेश दिया गया।मंत्री व अधिकारियों ने किया पौधारोपण, दी दीर्घकालिक संरक्षण की सीख
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) राकेश राठौर ‘गुरु जी’ ने कहा कि वृक्षारोपण केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि भावी पीढ़ी को सुरक्षित भविष्य देने की जिम्मेदारी है। वहीं, शासन द्वारा नामित नोडल अधिकारी पी० गुरुप्रसाद, आईएफएस ने स्पष्ट किया कि अभियान की सफलता पौधों की संख्या में नहीं, बल्कि उनके जीवित रहने और बेहतर संरक्षण में है। उन्होंने जियो टैगिंग और नियमित अनुश्रवण पर विशेष जोर दिया। इस अवसर पर डीएम, एसपी समेत जिले के शीर्ष अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
सांस्कृतिक रंग में रंगा अभियान, युवाओं व संगठनों में दिखा विशेष उत्साह
कार्यक्रम की शुरुआत बालिका इंटर कॉलेज की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई, जिसमें पर्यावरण बचाने का मार्मिक संदेश दिया गया। अभियान में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही। आईटीआई, पीटीसी प्रशिक्षुओं, एनसीसी कैडेट्स व विभिन्न सामाजिक संगठनों आईएमए, रोटरी क्लब, रेडक्रॉस ने बढ़-चढ़कर पौधे लगाए। जिले की सभी विधानसभाओं में स्थानीय विधायकों के नेतृत्व में वृहद स्तर पर पौधारोपण हुआ।
डिजिटल मॉनिटरिंग व नवाचारों से मिली पारदर्शिता
इस बार अभियान को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया गया। जिला कमाण्ड सेंटर के माध्यम से रियल टाइम मॉनिटरिंग हुई। क्यूआर कोड आधारित वितरण प्रणाली, मोबाइल एप और डिजिटल डैशबोर्ड के उपयोग से पूरे कार्यक्रम में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित की गई। प्रभागीय निदेशक, सामाजिक वानिकी, नवीन खण्डेलवाल ने बताया कि इस बार पौधों की सुरक्षा के लिए त्रि-वर्षीय संरक्षण योजना पर काम किया जा रहा है।
अटल वन बना प्रेरणा का केंद्र
 मुख्य कार्यक्रम के बाद राज्य मंत्री व नोडल अधिकारी ने वर्ष 2025 में विकसित 'अटल वन' का निरीक्षण किया। 5 हेक्टेयर में लगे पौधों की उच्च जीवितता दर और शानदार विकास देखकर अतिथियों ने वन विभाग के कार्यों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और इसे प्रदेश के लिए मॉडल बताया।

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