सीतापुर(उत्तर प्रदेश): शहर में अवैध निर्माण और बिना अनुमति के की जा रही प्लॉटिंग पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। नियत प्राधिकारी/नगर मजिस्ट्रेट ने उत्तर प्रदेश आर.बी.ओ. एक्ट, 1958 के प्रावधानों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि अब बिना सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति के कोई भी निर्माण कार्य नहीं होगा। यह नियम आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक, शैक्षणिक और कार्यालयी भवनों के साथ-साथ उनके पुनर्निर्माण और विस्तार पर भी समान रूप से लागू होगा।
प्रशासन ने जमीन मालिकों और डेवलपर्स को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि स्वीकृत ले-आउट प्लान के बिना भूमि का विभाजन या बिक्री पूर्णतः अवैध है। नियत प्राधिकारी ने आम नागरिकों और संभावित प्लॉट खरीदारों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अपनी मेहनत की कमाई सुरक्षित रखने के लिए किसी भी भूखंड को खरीदने से पहले खरीदार विनियमित क्षेत्र कार्यालय से ले-आउट की वैधता और स्वीकृति की स्थिति की जांच अवश्य कर लें।
नियमों की अवहेलना करने वालों के विरुद्ध प्रशासन का रुख सख्त है। बिना स्वीकृत नक्शे के पाए गए निर्माणों को न केवल ढहाया जाएगा, बल्कि उ.प्र. आर.बी.ओ. एक्ट के अंतर्गत कंपाउंडिंग शुल्क और अन्य दंडात्मक कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी। विनियमित क्षेत्र, सीतापुर के नियोजित विकास को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने सभी संबंधितों से नियमों का सख्ती से पालन करने का आग्रह किया है। जानकारी के लिए कार्य दिवसों में कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।
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