मानपुर/बिसवां,सीतापुर(उत्तर प्रदेश):जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज अपनी 81वीं यात्रा के क्रम में मंगलवार को बिसवां की पावन धरा पर पधारे। मानपुर स्थित जगमोहन दास कुटिया में आयोजित कार्यक्रम में भारी संख्या में श्रद्धालु एकत्रित हुए, जहां महाराज जी ने अपने आशीर्वचनों से भक्तों को अनुग्रहित किया।
अपने प्रवचन में शंकराचार्य जी ने राम मंदिर के गौरवपूर्ण इतिहास और वर्तमान व्यवस्था पर चिंतन व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जिस पवित्र भूमि के लिए अनगिनत कारसेवकों ने त्याग किया,और अपना सर्वस्व न्योछावर किया, उस स्थान की मर्यादा और पवित्रता अक्षुण्ण रहना अनिवार्य है। उन्होंने धर्म के मार्ग पर चलते हुए स्पष्ट किया कि मंदिरों का प्रबंधन केवल धर्माचार्यों और संतों के अधीन होना चाहिए, ताकि आध्यात्मिक वातावरण और पूजा-अर्चना की व्यवस्था पूरी तरह से धर्म सम्मत बनी रहे। उन्होंने कहा कि आस्था के केंद्रों की व्यवस्था में यदि कोई त्रुटि होती है, तो उसे सुधारना धर्म का प्रथम कार्य है, क्योंकि भक्तों की श्रद्धा के साथ खिलवाड़ कतई स्वीकार्य नहीं है
गौ-सेवा के विषय पर बोलते हुए स्वामी जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गौ को सदैव माता का स्थान प्राप्त है। उन्होंने जनसमूह का आह्वान करते हुए कहा कि हमें गाय को मात्र एक पशु नहीं, बल्कि जगत की माता के रूप में पूजनीय मानना चाहिए। गौ-वंश की रक्षा और उन्हें उचित सम्मान दिलाना प्रत्येक सनातन धर्मी का पावन कर्तव्य है। उन्होंने बल देकर कहा कि यदि गौ-माता को उचित सम्मान प्राप्त नहीं होता है, तो समाज को एकजुट होकर धर्म की रक्षा के लिए संकल्प लेना होगा और गौ-माता को उनका अधिकार दिलाना होगा।
इस अवसर पर बिसवां के बड़े चौराहे और मंसाराम चौराहे पर भक्तों ने श्रद्धा के साथ पुष्प वर्षा कर महाराज जी का अभिनंदन किया। दर्शन पाने और प्रवचन सुनने के लिए क्षेत्र से बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। प्रमुख व्यक्तियों में दिग्विजय सिंह, प्रदीप सिंह चौहान, शांति यादव, अमर मेहरोत्रा, मूलचंद यादव, ममता शर्मा, चंद्र कुमार सिंह तोमर और सुनील यादव सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे। सभी ने शंकराचार्य जी के संदेश को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
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