सीतापुर(उत्तर प्रदेश): जनपद में शून्य से पांच साल तक के बच्चों को डायरिया से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। जिले में 'स्टॉप डायरिया' अभियान की शुरुआत अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल कुमार त्रिपाठी ने प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर की। पीएसआई इंडिया व केनव्यू के सहयोग से संचालित यह जागरूकता वाहन पूरे जिले में भ्रमण कर लोगों को जागरूक करेगा।
10 जुलाई से 25 अगस्त तक चलेगा महाभियान
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एस.आर. सम्मदर के निर्देशन में चलाए जा रहे इस अभियान के तहत 10 जुलाई से 25 अगस्त तक घर-घर दस्तक दी जाएगी। इस दौरान आशा कार्यकर्ता 0-5 वर्ष के बच्चों की सूची बनाएंगी। यदि कोई बच्चा डायरिया से पीड़ित मिलता है, तो उसे तत्काल ओआरएस का घोल उपलब्ध कराया जाएगा और परिजनों को इसका सही उपयोग सिखाया जाएगा। गंभीर स्थिति होने पर बच्चे को तुरंत सरकारी अस्पताल रेफर करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशिक्षित फ्रंटलाइन वर्कर बढ़ाएंगे जागरूकता
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल कुमार त्रिपाठी ने कहा कि डायरिया की शुरुआत में ही पहचान कर ओआरएस व जिंक का सेवन कराने से बच्चे की जान बचाई जा सकती है। उन्होंने रोटा वायरस वैक्सीन की महत्ता पर भी जोर दिया। जिला स्वास्थ्य सूचना शिक्षा अधिकारी के.एन. मिश्रा ने बताया कि आशा, एएनएम और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है, जो समुदाय को स्तनपान, हाथ धोने की सही विधि और डायरिया प्रबंधन के प्रति जागरूक कर रही हैं।
स्वास्थ्य केंद्रों पर स्थापित किए गए जिंक कॉर्नर
अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर ओआरएस व जिंक कॉर्नर स्थापित किए गए हैं, ताकि फ्रंट लाइन कार्यकर्ताओं के माध्यम से बच्चों को समय पर उपचार मिल सके। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. इमरान ने डायरिया की स्थिति में ओआरएस और जिंक की सही मात्रा देने पर जोर दिया। इस अवसर पर उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राज शेखर सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी व सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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