#सीतापुर में तिलहन क्रांति: किसान उत्पादक संगठन बनेंगे सरकारी 'पार्टनर', अब किसानों के साथ संगठनों की भी बढ़ेगी आमदनी

सीतापुर(उत्तर प्रदेश): जनपद के किसान समूहों के लिए सरकारी तंत्र से जुड़कर अपनी ताकत दिखाने का बड़ा मौका सामने आया है। खेती-किसानी को लाभ का धंधा बनाने के संकल्प के साथ सरकार अब किसान उत्पादक संगठन एफपीओ को अपना बिजनेस पार्टनर बनाने जा रही है। नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल (तिलहन मिशन)के तहत जिले के एफपीओ को न केवल किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की जिम्मेदारी मिलेगी, बल्कि काम के बदले उन्हें सरकारी बजट से सीधा भुगतान भी किया जाएगा। उप कृषि निदेशक ने इसके लिए आवेदन आमंत्रित करते हुए 4 मई की समय सीमा तय की है।
हाईटेक होगी खेती 'कृषि मैपर' ऐप पर दर्ज होगी पल-पल की जानकारी
अब सरकारी योजनाओं में कागजी खानापूर्ति नहीं चलेगी। चयनित किसान उत्पादक संगठन को किसानों के खेत की लोकेशन से लेकर फसल की फोटो तक 'कृषि मैपर' ऐप पर अपलोड करनी होगी। बीज वितरण से लेकर ट्रेनिंग तक का पूरा ब्योरा डिजिटल होगा, जिससे योजना में पूरी पारदर्शिता बनी रहे।
मिट्टी की जांच से ट्रेनिंग तक: किसान उत्पादक संगठन को निभानी होगी 'ऑल-राउंडर' भूमिका
इस मिशन के तहत संगठनों का काम सिर्फ बीज बांटना नहीं है। उन्हें हर किसान के खेत की मिट्टी का नमूना लेकर लैब में जमा करना होगा। साथ ही 'फार्म स्कूल' चलाकर किसानों को यह सिखाना होगा कि कम लागत में तिलहन की बम्पर पैदावार कैसे ली जाए।
समय कम और मुकाबला कड़ा: 4 मई तक खैराबाद दफ्तर में जमा होंगे आवेदन
जिले के सैकड़ों संगठनों में से बेस्ट का चुनाव करने के लिए जिला स्तरीय कमेटी मापदंडों की बारीकी से जांच करेगी। आवेदन के लिए केवल 4 मई तक की मोहलत दी गई है। जो किसान उत्पादक संगठन  डिजिटल काम में माहिर और किसानों के बीच सक्रिय होंगे, बाजी उनके हाथ लगने की पूरी उम्मीद है।

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