सीतापुर(उत्तर प्रदेश)।सीतापुर में पेराई सत्र 2026-27 के लिए गन्ना सर्वे की नीति जारी कर दी गई है। यह सर्वे 1 मई से 30 जून तक चलेगा। सर्वे प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए गन्ना विभाग, मिल और समिति के कर्मचारियों की एक तीन सदस्यीय टीम बनाई गई है, जो जीपीएस युक्त मशीनों और 'गन्ना सूचना प्रणाली' के माध्यम से खेतों का निरीक्षण करेगी।
(काल्पनिक चित्र)
किसानों की सुविधा के लिए व्यवस्था की गई है कि सर्वे से तीन दिन पहले ही उन्हें उनके मोबाइल पर सूचना दे दी जाएगी। इस संदेश में टीम के सदस्यों के नाम और उनके मोबाइल नंबर की जानकारी होगी। सर्वे के समय किसान का अपने खेत पर मौजूद रहना अनिवार्य है।
इसके साथ ही, किसानों को घोषणापत्र जमा करना भी अनिवार्य कर दिया गया है। इसे ऑनलाइन या ऑफलाइन किसी भी तरह जमा किया जा सकता है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि घोषणापत्र न देने पर किसान का सट्टा बंद कर दिया जाएगा, जिससे आपूर्ति में बाधा आ सकती है।
जिले में गन्ने का रकबा सवा दो लाख हेक्टेयर है और करीब पौने चार लाख किसान गन्ने की खेती करते हैं। ये किसान जिले की छह चीनी मिलों रामगढ़, जवाहरपुर, बिसवां, हरगांव, महमूदबाद और कमलापुर के अलावा हरदोई की हरियांवा, खीरी की अजबापुर व ऐरा और बाराबंकी की हैदरगढ़ चीनी मिलों में गन्ना आपूर्ति करते हैं। जिले में सीतापुर, हरगांव, बिसवां, महमूदबाद, कमलापुर, महोली और रामगढ़ नामक सात गन्ना समितियां कार्यरत हैं।
उल्लेखनीय है कि 17 वर्षों से बंद पड़ी कमलापुर चीनी मिल का सफल ट्रायल मार्च महीने में पूरा हो चुका है। अब आगामी सत्र से यह मिल पूरी क्षमता के साथ पेराई शुरू करेगी और संभावना है कि इसे पुराना गन्ना क्षेत्र पुनः आवंटित कर दिया जाएगा।
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