# सीतापुर:अवैध निर्माण ढहाकर बनेगा वेंडिंग जोन: निरस्त होंगे नजूल के 120 साल पुराने पट्टे

जिलाधिकारी न्यायालय ने जारी किया पब्लिक नोटिस, छावनी कदीम की 0.401 हेक्टेयर सरकारी जमीन बिना मुआवजे के वापस लेगी सरकार; 3 जून तक माँगी आपत्तियाँ
सीतापुर (उत्तर प्रदेश):शहर के दिल कहे जाने वाले बटसगंज और कैँची पुल क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने और जाम की झंझट से मुक्ति दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी न्यायालय (नजूल) ने ग्राम छावनी कदीम स्थित करोड़ों रुपये मूल्य की 0.401 हेक्टेयर बहुमूल्य नजूल भूमि को वापस राज्य सरकार के कब्जे में लेने  की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस सरकारी जमीन पर वर्षों से मूल आवंटन की शर्तों का उल्लंघन कर अवैध रूप से पक्के मकान, दुकानें और टीनशेड तान दिए गए थे। जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर. ने नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के तहत सार्वजनिक नोटिस जारी कर अवैध कब्जाधारकों और प्रभावित पक्षों से आगामी 3 जून 2026 तक साक्ष्यों के साथ लिखित आपत्तियाँ मांगी हैं। यदि इस अवधि में कोई ठोस दावा पेश नहीं किया गया, तो प्रशासन एकपक्षीय कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर जमीन खाली करा लेगा।
120 साल पुराने पट्टे स्वतः समाप्त, शर्तों का हुआ घोर उल्लंघन
प्रशासनिक जांच में सामने आया है कि इस विवादित नजूल भूखण्ड संख्या 1692, 1693/1 और 1693/2 का पट्टा ब्रिटिश काल में आज से ठीक 120 वर्ष पूर्व यानी 30 मार्च 1906 को आवंटित किया गया था। भूखण्ड संख्या 1692 को महज 5 रुपये 12 आना वार्षिक लगान पर "बाग" लगाने के विशिष्ट उद्देश्य के लिए दिया गया था, जबकि अन्य दो भूखण्ड तालाब और खेती के लिए दर्ज थे। नजूल मैनुअल के प्रस्तर-23 के कड़े प्रावधानों के मुताबिक, भवन निर्माण से भिन्न ऐसे कार्यों  के लिए दिए गए पट्टे अधिकतम 30 वर्ष तक ही वैध रह सकते हैं। इस लिहाज से ये पट्टे दशकों पहले स्वतः ही समाप्त हो चुके हैं। इसके बावजूद आवंटियों के उत्तराधिकारियों और अनधिकृत कब्जेदारों ने पूरे नियम-कायदे ताक पर रखकर यहाँ धड़ल्ले से कमर्शियल और आवासीय निर्माण खड़े कर लिए।
वर्ष 2006 में हुआ अवैध खरीद-फरोख्त का बड़ा खेल
राजस्व अभिलेखों की पड़ताल से इस बेशकीमती सरकारी जमीन को निजी तौर पर बेचने के एक बड़े खेल का भी पर्दाफाश हुआ है। वर्ष 2006 में तत्कालीन खातेदारों ने जिलाधिकारी या राज्य सरकार की अनिवार्य पूर्व अनुमति लिए बिना ही इस नजूल भूमि का विक्रय  कर दिया था। यह सीधे तौर पर नजूल मैनुअल के प्रस्तर 13, 14, 51 और 53 का खुला उल्लंघन है। प्रशासन ने इस 20 साल पुराने सेल डीड को कानूनन शून्य घोषित करने की तैयारी कर ली है। तहसीलदार सदर के नेतृत्व में गठित राजस्व और नगर पालिका की संयुक्त टीम ने अपनी स्थलीय जांच रिपोर्ट में भी इस घोर उल्लंघन की पुष्टि की है।
जाम से मिलेगी मुक्ति, कैँची पुल के पास बनेगा भव्य 'वेंडिंग जोन'
इस पूरी कवायद का सबसे बड़ा लाभ सीतापुर की आम जनता को मिलने जा रहा है। नगर पालिका परिषद सीतापुर ने प्रशासन को पत्र भेजकर मांग की थी कि कैँची पुल और बटसगंज क्षेत्र में सड़क किनारे होने वाले अनियंत्रित अतिक्रमण और भीषण जाम की समस्या को दूर करने के लिए एक व्यवस्थित 'वेंडिंग जोन' की सख्त जरूरत है। इसी लोकहित को सर्वोपरि रखते हुए जिलाधिकारी ने इस 0.401 हेक्टेयर भूमि को खाली कराकर नगर पालिका को सौंपने का प्रस्ताव तैयार किया है। यहाँ वेंडिंग जोन विकसित होने से पटरी दुकानदारों को व्यवस्थित जगह मिलेगी और शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से चाक-चौबंद हो जाएगी।
 रजिस्ट्री और म्यूटेशन पर तत्काल रोक
 जिलाधिकारी ने आदेश की प्रति उप-निबंधक  को भेजकर इस जमीन या इसके किसी भी हिस्से की खरीद-बिक्री, उप-पट्टा, बंधक या उपहार से जुड़े किसी भी दस्तावेज के पंजीकरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। साथ ही अधिशासी अधिकारी नगर पालिका को निर्देशित किया गया है कि इस भूभाग पर किसी भी प्रकार के निर्माण की अनुमति या नामांतरण  की प्रक्रिया पर पूरी तरह ब्रेक लगाया जाए।


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