ऐतिहासिक फैसला: 89 साल बाद प्रशासन लेगा कब्जा, 15 दिन में कोठी खाली करने का डीएम न्यायालय का कड़ा फरमान
सीतापुर(उत्तर प्रदेश):शहर के पॉश इलाके बटसगंज स्थित बेशकीमती नजूल संपत्ति 'रानी कोठी' पर प्रशासन का डंडा चलने वाला है, जिलाधिकारी न्यायालय ने शनिवार को एक और बड़ा फैसला सुनाते हुए कोठी पर काबिज अवैध कब्जाधारकों की सभी आपत्तियों को खारिज कर दिया है। डीएम राजा गणपति आर ने नगरपालिका को सख्त निर्देश दिए हैं कि 15 दिनों के भीतर कोठी को खाली कराकर प्रशासन अपने कब्जे में ले।इस बेशकीमती जमीन का उपयोग अब जनहित में किया जाएगा। यहां असहाय और निर्धन बुजुर्गों के लिए एक आधुनिक वृद्धाश्रम बनाया जाएगा। प्रशासन की इस कार्रवाई से अवैध कब्जा करने वालों में हड़कंप है।
खिंचा कानूनी खाका: 1936 में ही खत्म हो गया था पट्टा
जांच में सामने आया कि नजूल भूखंड संख्या 1568 रानी कोठी का मूल पट्टा कुंवर निहाल सिंह को केवल बागवानी के लिए दिया गया था। यह पट्टा वर्ष 1936 में ही समाप्त हो गया था। इसके बाद न तो नवीनीकरण के लिए आवेदन किया गया और न ही प्रशासन से अनुमति ली गई। नियमानुसार, पट्टा खत्म होते ही यह जमीन सरकारी घोषित हो चुकी थी।
अदालत में नहीं टिके कब्जेदारों के दावे
सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष ने दिल्ली हाईकोर्ट के प्रोबेट आदेश और 1957 के विक्रय-पत्र के आधार पर अपना मालिकाना हक जताने की कोशिश की। डीएम ने इसे पूरी तरह अवैध करार देते हुए कहा कि नजूल की जमीन को बिना जिलाधिकारी की अनुमति के बेचना या दान करना गैर-कानूनी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रोबेट आदेश सिर्फ वसीयत की पुष्टि करता है, मालिकाना हक की नहीं।
वीडियोग्राफी के बीच होगा कब्जा
जिलाधिकारी ने स्पष्ट आदेश दिया है कि बेदखली की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई जाएगी। यदि इस दौरान किसी ने भी बाधा उत्पन्न करने की कोशिश की, तो पुलिस बल का प्रयोग कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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