# सीतापुर:खुद भी बचें, बेजुबानों को भी बचाएं: डीएम सीतापुर की अपील- छतों पर रखें पानी, मूक पक्षियों की प्यास बुझाकर बचाएं जिंदगी.

लापरवाही पड़ सकती है भारी, जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर. ने नागरिकों और पशु-पक्षियों की सुरक्षा के लिए जारी किए निर्देश

सीतापुर (उत्तर प्रदेश):आसमान से बरसती आग और बढ़ते पारे को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर. ने जनपदवासियों को 'लू' के जानलेवा प्रकोप से बचाने के लिए एक जागरूकता एडवायजरी जारी की है। डीएम ने सख्त लहजे में अपील की है कि "सुरक्षा ही बचाव है", इसलिए सभी नागरिक अनावश्यक रूप से दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें और प्रशासन द्वारा बताए गए एहतियाती कदमों का पालन करें।
दोपहर 12 से 4 बजे तक विशेष सावधानी
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में चल रही तेज गर्म हवाएं और उच्च तापमान मानव शरीर के लिए बेहद घातक हैं। जब शरीर का तापमान बहुत बढ़ जाता है और वह खुद को ठंडा नहीं कर पाता, तो व्यक्ति 'हीट स्ट्रोक'  का शिकार हो जाता है। यह एक अत्यंत गंभीर स्थिति है। इससे बचने के लिए विशेषकर दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच, जब धूप का तीखापन सबसे ज्यादा होता है, तेज धूप में बाहर निकलने से सख्ती से बचें।
पहचानें लू के लक्षण और बरतें ये सावधानियां
प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों और सूचना के अनुसार, लू के मुख्य लक्षणों को पहचानना बेहद जरूरी है ताकि समय रहते प्राथमिक उपचार किया जा सके प्रमुख लक्षण: तेज बुखार, लगातार चक्कर आना, सिरदर्द, उल्टी या मितली महसूस होना, अत्यधिक कमजोरी, बेहोशी और त्वचा का अचानक गर्म व सूखा हो जाना।
 बचाव के आसान उपाय: घर से बाहर निकलते समय अपने सिर को हमेशा टोपी, गमछे या छाते से ढककर रखें,खाली पेट कभी भी धूप में न निकलें,हल्के, ढीले और सूती (कॉटन) कपड़े पहनें ताकि शरीर को हवा लगती रहे,प्यास न होने पर भी लगातार पानी, ओआरएस  का घोल, नींबू पानी, छाछ, लस्सी और नारियल पानी जैसे प्राकृतिक पेय पदार्थों का सेवन करते रहें।
मूक पक्षियों के प्रति भी निभाएं अपनी जिम्मेदारी
मानव जीवन के साथ-साथ जिलाधिकारी ने बेजुबान पक्षियों और जानवरों की सुरक्षा पर भी विशेष जोर दिया है। उन्होंने जनपदवासियों से एक भावुक और जरूरी अपील करते हुए कहा कि हमारी एक छोटी सी कोशिश किसी मूक पक्षी की जान बचा सकती है।
 पानी का बर्तन रखें: अपने घर की छत, बालकनी या आंगन में मिट्टी या प्लास्टिक के बर्तनों में साफ पानी भरकर जरूर रखें।
 ऊंचाई पर रखें स्थान:पानी के बर्तनों को जमीन से थोड़ी ऊंचाई पर या लटका कर रखें ताकि पानी गंदा न हो और आवारा जानवरों से पक्षी सुरक्षित रहें।
 नियमित रूप से बदलें पानी: हर दिन बर्तनों का पानी बदलें ताकि वह साफ और ताजा बना रहे। बर्तनों की समय-समय पर सफाई भी जरूरी है।
 कम गहराई वाले बर्तन चुनें: उथले या कम गहरे बर्तनों का चयन करें ताकि छोटे पक्षी भी आसानी से और बिना डूबे पानी पी सकें। इसके साथ ही पानी को हमेशा छांव वाले स्थान पर रखें, क्योंकि धूप में पानी बहुत जल्दी गर्म हो जाता है।
जरूरी सूचना
जिला प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि किसी भी व्यक्ति में लू के गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत नजदीकी सरकारी डॉक्टर या स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें लापरवाही भारी पड़ सकती है। हेल्पलाइन नंबर 1070 या व्हाट्सएप नंबर 9454441081 पर भी आपातकालीन स्थिति में संपर्क किया जा सकता है।


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