# ममता का महासागर: कहीं आँचल की छाँव का सुकून, तो कहीं यादों में बसी दुआओं की शक्ति

नमन है दुनिया की हर उस माँ को, जो प्रेम की परिभाषा है  🙏
💐दुनिया में 'माँ' वह अकेला शब्द है जिसे कहने के लिए लबों से ज़्यादा दिल की ज़रूरत होती है। वह ईश्वर का वह रूप है जिसे हम छू सकते हैं, देख सकते हैं और महसूस कर सकते हैं। माँ का होना एक ऐसे वरदान की तरह है जो हर तूफ़ान के आगे दीवार बनकर खड़ी हो जाती है। लेकिन ममता का यह सफर केवल मौजूदगी तक सीमित नहीं है। जिनके सिर पर माँ का हाथ है, उनके लिए वह संसार की सबसे बड़ी ताकत है, और जिनकी माँ स्मृतियों में विलीन हो चुकी हैं, उनके लिए वह एक ऐसी अदृश्य रूहानी शक्ति है जो आज भी हर मुश्किल मोड़ पर उनका हाथ थामे रहती है। आज मदर्स डे का यह विशेष अवसर उसी निस्वार्थ प्रेम और त्याग के वंदन का दिन है।
घर  की नींव में दबी एक मूरत
माँ के त्याग की कोई सीमा नहीं होती। वह घर की उस नींव की ईंट की तरह है, जो खुद अंधेरे में रहकर पूरे परिवार के महल को मजबूती प्रदान करती है। परिवार की छोटी-बड़ी खुशियों के लिए वह अपनी इच्छाओं का गला घोंटने में कभी संकोच नहीं करती। सुबह की पहली चाय से लेकर रात के आखिरी खाने तक, उसकी हर हरकत में केवल अपनों का हित छिपा होता है। वह खुद फटी साड़ी पहन लेगी, लेकिन बच्चों के लिए नए कपड़ों का इंतजाम करना नहीं भूलती। माँ का यह 'मौन संघर्ष' ही है जो एक साधारण मकान को 'घर' और परिवार को 'संस्कारित समाज' बनाता है। उसका त्याग किसी प्रशंसा या पुरस्कार का भूखा नहीं, बल्कि केवल बच्चों की एक मुस्कुराहट से तृप्त हो जाता है।
खाली आँगन और महकती यादें दूर होकर भी पास है माँ
कहते हैं कि माँ कभी अपने बच्चों को अकेला नहीं छोड़ती। भले ही कालचक्र ने उन्हें हमसे शारीरिक रूप से दूर कर दिया हो, लेकिन घर के खाली आँगन में आज भी उनकी दुआओं की खुशबू महकती है। जिनके पास माँ नहीं है, उनके लिए 'मदर्स डे' यादों के झरोखे खोलने जैसा है। संकट के समय जब हौसला टूटने लगता है, तब माँ की कही हुई बातें कानों में गूँज उठती हैं और गिरते हुए कदमों को फिर से खड़ा कर देती हैं। वह भले ही दिखाई न दे, लेकिन उसकी दी हुई सीख आज भी एक अदृश्य रक्षक की तरह साथ चलती है। माँ का न होना एक शून्य तो पैदा करता है, पर उसकी स्मृतियाँ उस शून्य को दिव्यता से भर देती हैं।
आप में आज भी जीवित है उनकी झलक
माँ की सबसे बड़ी वसीयत सोना-चांदी नहीं, बल्कि उसके द्वारा दिए गए 'संस्कार' होते हैं। जब हम ईमानदारी से अपना काम करते हैं, जब हम किसी कमजोर की मदद को हाथ बढ़ाते हैं, या जब हम मुश्किलों में भी धैर्य नहीं खोते तो समझ लीजिए कि हमारे भीतर हमारी 'माँ' जीवित है। आपकी आँखों की चमक, आपकी वाणी की सौम्यता और आपके व्यक्तित्व की गरिमा में कहीं न कहीं उसी ममता की छाया है। माँ के आदर्शों को अपने जीवन में उतारना ही उनके प्रति सबसे सच्ची कृतज्ञता है। आप दुनिया के किसी भी कोने में हों, यदि आप नेक राह पर हैं, तो माँ का अंश और उनकी छवि आपके साथ हमेशा सुरक्षित है।
मदर्स डे महज़ एक तारीख नहीं, बल्कि एक अहसास है
माँ का कर्ज चुकाया नहीं जा सकता, इसे सिर्फ जीया जा सकता है। वह पास हो तो उसकी सेवा ही सबसे बड़ी इबादत है, और अगर वह ईश्वर के पास है तो उसके बताए नेक रास्तों पर चलना ही उसे सच्ची श्रद्धांजलि है। मदर्स डे महज़ एक तारीख नहीं, बल्कि एक अहसास है यह याद दिलाने के लिए कि हम जो कुछ भी हैं, और जो कुछ भी बनेंगे, उसके पीछे उस एक शख्स की तपस्या है जिसे हम 'माँ' कहते हैं। आज के दिन आइए संकल्प लें कि हम उस ममता का मान कभी कम नहीं होने देंगे।

कलम से:
अनुराग शुक्ला
(वॉइस ऑफ सीतापुर)         


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