सीतापुर (उत्तर प्रदेश):उत्तर प्रदेश के सीतापुर में विशेष अदालत ने साल 1992 के एक बहुचर्चित तिहरे हत्याकांड और गैंगस्टर एक्ट के मामले में चार अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला राज्य पुलिस के विशेष अभियान 'ऑपरेशन कंविक्शन' के तहत की गई प्रभावी पैरवी के बाद आया है। अदालत ने उम्रकैद के साथ-साथ दोषियों पर 1,17,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
मस्जिद के बाहर अंधाधुंध फायरिंग
यह पूरा मामला सीतापुर के अटरिया थाना क्षेत्र के मनवा गांव का है। पुलिस और अदालती दस्तावेजों के अनुसार, साल 1992 में गांव में चुनावी रंजिश और पुरानी दुश्मनी को लेकर दो पक्षों में तनाव था। घटना के दिन वादी पक्ष के लोग अफाक, सलामतुल्लाह, मौलाना जुबेर और अब्दुल कयूम गांव की एक मस्जिद में नमाज़ अदा करने के लिए इकट्ठा हुए थे, तभी दूसरे पक्ष ने उन पर हमला कर दिया।
तीन लोगों की मौत, दो गंभीर रूप से घायल
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आरोपी जलील, रफात अली उर्फ रफ्फू, प्यारे लाल और नसीर बंदूक, तमंचे और रिवाल्वर जैसे घातक हथियारों से लैस होकर आए थे। उन्होंने मस्जिद के पास मौजूद लोगों पर अचानक अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में अफाक, सलामत और मौलाना जुबेर की गोली लगने से मौत हो गई, जबकि अब्दुल कयूम और यासीन गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
34 साल बाद कानूनी अंजाम
घटना के बाद पुलिस ने मुकदमा मु.अ.सं. 44/1992 दर्ज कर जांच शुरू की और बाद में आरोपियों पर यूपी गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया। पुलिस महानिदेशक कार्यालय के निर्देश पर चल रहे 'ऑपरेशन कंविक्शन' के तहत सीतापुर पुलिस ने इस दशकों पुराने मामले में अदालत के सामने ठोस सबूत और गवाह पेश किए। आखिरकार, विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट ने चारों अभियुक्तों को हत्या धारा 302 और गैंगस्टर एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में दोषी पाते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
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