सीतापुर(उत्तर प्रदेश): कारागार राज्य मंत्री सुरेश राही ने प्रशासनिक अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। मंत्री ने एसडीएम सदर और क्षेत्रीय लेखपाल पर भ्रष्टाचार और मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि दोनों अधिकारियों ने समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं को खुश करने के लिए बिना किसी कानूनी नोटिस के दलितों के घरों की दीवारें ढहा दीं। उन्होंने इस पूरे मामले में लेन-देन होने की आशंका भी जताई है।
बिना जांच और नोटिस के हुई कार्रवाई
सुरेश राही ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि जिस जमीन पर कार्रवाई की गई, वहां दलितों का वैध पट्टा था और उनके पास पूरे कागजात मौजूद थे। उन्होंने खुद अधिकारियों को फोन कर किसी भी तरह की एकतरफा कार्रवाई न करने को कहा था। इसके बावजूद, जिलाधिकारी के आदेशों को ताक पर रखकर, बिना किसी जांच या पूर्व नोटिस के दलितों के आशियाने उजाड़ दिए गए। मंत्री के मुताबिक, जब पीड़ित अपने कागजात दिखाने पहुंचे, तो एसडीएम ने उन्हें वहां से डांटकर भगा दिया।
सांठगांठ का आरोप
राज्य मंत्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, "एसडीएम ने अपनी वाहवाही लूटने और सपा कार्यकर्ताओं को उपकृत करने के लिए यह कदम उठाया है। मुझे जो जानकारी मिली है, उसके अनुसार इस मामले में बड़े पैमाने पर पैसे का लेन-देन हुआ है।" उन्होंने क्षेत्रीय लेखपाल (रस्तोगी) पर भी गंभीर सवाल उठाए और कहा कि लेखपाल रात के 11-11 बजे पीड़ितों के घर जाकर उन्हें प्रताड़ित कर रहा था, जो कि उसकी ड्यूटी का हिस्सा नहीं है।
प्रभारी मंत्री से शिकायत, होगी उच्च स्तरीय जांच
मंत्री सुरेश राही ने साफ किया कि वह इस तानाशाही को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने इस संबंध में जिले के प्रभारी मंत्री से भी बात की है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मामले की पूरी उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर एसडीएम व लेखपाल के खिलाफ सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने गरीबों की आवाज उठाने के लिए मीडियाकर्मियों का भी धन्यवाद किया।
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