#सीतापुर:गुमशुदा फ़ोन मिलने की उम्मीद छोड़ चुके लोगों के चेहरों पर लौटी मुस्कान, क्या है पूरा मामला?

 केंद्रीय पोर्टल CEIR की मदद से सीतापुर पुलिस ने बरामद किए 18 मोबाइल, तकनीक पर बढ़ा भरोसा

सीतापुर(उत्तर प्रदेश): भारत में स्मार्टफोन अब सिर्फ़ बातचीत का ज़रिया नहीं, बल्कि आम लोगों की कमाई, बैंकिंग और निजी डेटा का सबसे बड़ा लॉकर बन चुका है। ऐसे में मोबाइल का खो जाना किसी बड़े झटके से कम नहीं होता। लेकिन उत्तर प्रदेश के सीतापुर ज़िले से एक ऐसी ख़बर आई है जो तकनीक और पुलिस की कार्यप्रणाली पर आम लोगों के भरोसे को मज़बूत करती है। यहाँ की स्थानीय कोतवाली नगर पुलिस ने भारत सरकार के एक विशेष डिजिटल पोर्टल की मदद से विभिन्न कंपनियों के 18 गुमशुदा मोबाइल फ़ोन बरामद किए हैं, जिनकी बाज़ार में क़ीमत क़रीब 3.6 लाख रुपये है।
 क्या है वह तकनीक जिससे मुमकिन हुई बरामदगी?
आमतौर पर मोबाइल खोने के बाद लोगों को लगता है कि उनका डिवाइस अब कभी वापस नहीं मिलेगा। लेकिन इस मामले में पुलिस ने केंद्रीय संचार मंत्रालय के सेंट्रल इक्विपमेंट आइडेंटिटी रजिस्टर पोर्टल का सहारा लिया। यह एक ऐसा सरकारी सिस्टम है जो चोरी या खोए हुए फ़ोन के आईएमईआई नंबर को ब्लॉक और ट्रैक करने का काम करता है। स्थानीय पुलिस ने इस पोर्टल से मिले तकनीकी डेटा और लोकेशन का विश्लेषण किया, जिसके बाद एक-एक कर सभी 18 फ़ोनों को ट्रैक कर लिया गया।
पुलिस कप्तान की विशेष मुहिम का असर
यह पूरी कार्रवाई सीतापुर के पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल द्वारा चलाए जा रहे एक विशेष अभियान के तहत हुई है। इस मुहिम की निगरानी अपर पुलिस अधीक्षक उत्तरी आलोक सिंह और क्षेत्राधिकारी कपूर कुमार कर रहे थे, जबकि ज़मीनी स्तर पर इसका नेतृत्व प्रभारी निरीक्षक दिनेश प्रकाश पाण्डेय की टीम ने किया। पुलिस का कहना है कि उनका मक़सद सिर्फ़ अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि तकनीक का इस्तेमाल कर आम नागरिकों की खोई हुई चीज़ें उन तक पहुँचाना भी है।
"उम्मीद खो चुके थे, लेकिन पुलिस ने चौंका दिया"
जब इन 18 मोबाइल फ़ोनों को उनके वास्तविक मालिकों को सौंपा गया, तो थाने का माहौल देखने लायक था। अपना फ़ोन वापस पाने वाले एक आवेदक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "मुझे लगा था कि मेरा फ़ोन अब कभी नहीं मिलेगा और मेरा सारा डेटा चला गया। लेकिन पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने मुझे हैरान कर दिया।" सभी पीड़ितों ने पुलिस के इस बदले हुए और मददगार रवैये की सराहना की है।
इस अभियान में शामिल पुलिसकर्मी:
इस तकनीकी अभियान को सफल बनाने में प्रभारी निरीक्षक के साथ कांस्टेबल विनय कुमार, भूपेन्द्र राणा, रवि सिंह, दीपक राणा, प्रिंस तोंगर और प्रियाँक बिष्ट की मुख्य भूमिका रही।

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