अनकहे दर्द को समझेगी खाकी: सीतापुर में दिव्यांग जनों से संवाद के लिए पुलिस ने सीखी इशारों की जुबान.

पुलिस लाइन में अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस पर जागरूकता कार्यक्रम, दिव्यांगजनों की समस्याओं के त्वरित समाधान का लिया संकल्प.

सीतापुर(संवाददाता): समाज के हर वर्ग तक न्याय और सुरक्षा की सीधी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए सीतापुर पुलिस अब सांकेतिक भाषा से भी जुड़ेगी। अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस के उपलक्ष्य में शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक अंकुर अग्रवाल के निर्देशन में रिजर्व पुलिस लाइन में विशेष जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य पुलिसकर्मियों को सांकेतिक भाषा के प्रति जागरूक करना और दिव्यांग नागरिकों की शिकायतों को संवेदनशीलता से सुनकर उनका निस्तारण करना है।

संवाद की बाधा होगी दूर.कार्यशाला में दिव्यांग नागरिकों की समस्याओं को समझने और उनसे प्रभावी संवाद स्थापित करने पर विस्तृत चर्चा हुई। वक्ताओं ने बताया कि संवादहीनता के चलते कई बार दिव्यांगजन अपनी शिकायतें सही तरीके से दर्ज नहीं करा पाते। पुलिसकर्मियों को सांकेतिक भाषा के मूलभूत पहलुओं व संकेतों की जानकारी दी गई, ताकि थाने या चौकी आने वाले किसी भी दिव्यांग पीड़ित को अपनी बात रखने में कोई झिझक या परेशानी न हो।

संवेदनशीलता ही पुलिस का मूल मंत्र.कार्यक्रम में मौजूद प्रतिसार निरीक्षक शिवबालक वर्मा ने पुलिसकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि सांकेतिक भाषा दियांग बंधुओं से संपर्क साधने का सबसे सशक्त माध्यम है। पुलिस विभाग की प्राथमिकता है कि समाज का हर वर्ग, विशेषकर दिव्यांगजन, खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस करें। जब पुलिस उनकी भाषा समझेगी, तभी उन्हें बिना किसी बाधा के त्वरित सहायता मिल सकेगी।

सेवा और समर्पण का लिया संकल्प.कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने दिव्यांगजनों के प्रति संवेदनशीलता, सहानुभूति और पूर्ण समर्पण के साथ कार्य करने का संकल्प लिया। इस दौरान पुलिस लाइन के विभिन्न अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।

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