फसल अवशेष जलाने पर सख्त हुआ प्रशासन, गौशालाओं में पराली भेजने के दिए कड़े निर्देश.

सीतापुर(संवाददाता): जनपद में फसल अवशेष पराली एवं गन्ने की पत्तियां जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सख्त हो गया है। जिलाधिकारी डॉ. राजागणपति आर. ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि यदि किसी भी गांव में पराली जलाई गई, तो किसान के साथ-साथ संबंधित ग्राम प्रधान और निगरानी समिति के कर्मचारियों की भी सीधी जवाबदेही तय कर कार्रवाई होगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पराली जलाने से न केवल आबोहवा दूषित होती है, बल्कि खेत की मिट्टी में मौजूद उपयोगी सूक्ष्म जीव भी जलकर खत्म हो रहे हैं।

मिट्टी की घटेगी उर्वरता, नष्ट हो रहे सूक्ष्म जीव.डीएम ने कृषकों को सचेत करते हुए कहा कि मृदा एक सजीव इकाई है, जिसमें कई प्रकार के लाभकारी जीवाणु मौजूद रहते हैं। खेतों में आग लगाने से भूमि का तापमान बढ़ता है और कार्बनिक अंश घटते हैं। नतीजा यह होता है कि पौधे भूमि से आवश्यक पोषक तत्व और रासायनिक खाद ठीक से ग्रहण नहीं कर पाते। पर्यावरण के साथ-साथ यह किसानों की फसलों की सेहत के लिए भी बेहद घातक है।

ग्राम स्तर पर निगरानी समितियां गठित, एक सप्ताह में बैठकें.शासनादेश के अनुपालन में ग्राम प्रधान, राजस्व, कृषि और पंचायती राज विभाग के कर्मियों की संयुक्त टीम बनाई गई है। यह समिति गांवों में चौपाल, वॉल पेंटिंग और सोशल मीडिया के जरिए किसानों को जागरूक करेगी। एक सप्ताह के भीतर हर पंचायत में बैठक कर किसानों को पराली न जलाने का संकल्प दिलाया जाएगा। साथ ही, एक हेक्टेयर से अधिक जोत वाले किसानों की सूची बनाकर उन पर विशेष नजर रखी जाएगी।

कंबाइन हार्वेस्टर पर सीधी नजर, गौशालाओं को भेजी जाएगी पराली.प्रशासन ने चेतावनी दी है कि बिना 'सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम' के कंबाइन हार्वेस्टर चलाने की सूचना मिलते ही तत्काल पुलिस और तहसील को सूचित कर कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, पराली को इकट्ठा कर मनरेगा या वित्त आयोग के बजट से नजदीकी गौशालाओं तक पहुंचाया जाएगा। किसानों को मल्चर, हैप्पी सीडर और पैडी स्ट्राचापर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया जा रहा है। तहसील स्तर पर एसडीएम व कृषि अधिकारी इस व्यवस्था की निगरानी करेंगे।

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